1. Statutory Liquidity Ratio (SLR): इसे हिन्दी में वैधानिक तरलता अनुपात कहते हैं। यह बैंकों के लिए है। बैंकों को एसएलआर के रेट के मुताबिक अपने डिपॉजिटका हिस्सा खास सिक्योरिटीज में रखना पड़ता है।

2. Cash Reserve Ratio (CRR): इस रेट के मुताबिक बैंकों को अपने डिपॉजिट का हिस्सा कैश में रखना पड़ता है।

3. Repo Rate: यह वह रेट है, जिस पर बैंक आरबीआई से जरूरत पड़ने पर कर्ज लेते हैं।

4. Reverse Repo Rate: यह वह रेट है, जिस पर बैंकों को आरबीआई के पास रखे अपने पैसे पर इंटरेस्ट मिलता है।

5. Open Market Opeartion: आरबीआई इकोनॉमी में लिक्विडिटी को सही लेवल पर रखने के लिए इस टूल का इस्तेमाल करता है। इसके तहत वह सरकार के बॉन्ड्स और दूसरी सिक्योरिटीज को खरीदता या बेचता है।

6. Bank Rate: यह वह रेट है, जिस पर आरबीआई बैंकों को बहुत कम वक्त के लिए कर्ज देता है। इसके लिए बैंकों को केंद्रीय बैंक के पास किसी तरह की सिक्योरिटी नहीं रखनी पड़ती है।