कुछ हादसों में शरीर पर कट लगने या खून निकलने की जगह त्वचा जल जाती है। अकेले भारत में लगभग 6 से 7 लाख लोग हर वर्ष इस हादसे का शिकार होते हैं। लगभग 90 प्रतिशत ऐसे मामले हैं|

जलने के प्रकार को तीन भागों में बांटा जा सकता है। साथ ही यह इस बात पर निर्भर करते हैं कि जलने का घाव कितना गंभीर है

1.फर्स्ट डिग्री बर्न (First Degree Burn) : इस प्रकार में सिर्फ त्वचा की बाहरी परत जलती है, जिससे त्वचा लाल हो जाती है और सूजन के साथ दर्द होता है।

2.सेकंड डिग्री बर्न (Second Degree Burn) : इस प्रकार में त्वचा की बाहरी और उसके ठीक नीचे की परत जल जाती है। साथ में त्वचा लाल हो जाती है, फफोले पड़ जाते हैं और सूजन के साथ दर्द भी होता है।

3.थर्ड डिग्री बर्न (Third Degree Burn) : जलने के इस प्रकार में त्वचा की अंदरूनी परत तक जल जाती है। इससे फफोले पड़ जाते हैं, जिससे त्वचा सफेद या काली हो जाती है। इस वजह से त्वचा सुन्न भी पड़ सकती है, जिस वजह से शायद दर्द का एहसास न हो पाए।

4.माइनर बर्न-शरीर के किसी भी भाग पर फर्स्ट डिग्री बर्न।शरीर के किसी भी भाग पर लगभग दो-तीन इंच से कम सेकंड डिग्री बर्न।

5.थर्ड डिग्री बर्न-शरीर के किसी भी भाग पर लगभग दो से तीन इंच से ज्यादा सेकंड डिग्री बर्न।हाथ, चेहरा, पैर, जांघ, नितंब या किसी जोड़ पर सेकंड डिग्री बर्न|